CG NEWS: स्टिंग ऑपरेशन में बड़ा खुलासा: बाइक पर ‘इलाज’, बैग में इंजेक्शन, गांवों में बेखौफ घूम रहे कथित फर्जी डॉक्टर
बिलासपुर। बिलासपुर के ग्रामीण इलाकों से सामने आई तस्वीरें स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं। गांव-गांव घूमकर मरीजों के घर इलाज करने का दावा करने वाले कथित फर्जी डॉक्टर खुलेआम इंजेक्शन लगा रहे हैं, जबकि उनके पास वैध योग्यता और अधिकार होने पर गंभीर सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नियम साफ हैं, कार्रवाई के अधिकार मौजूद हैं और पहले भी ऐसे मामलों में लोगों की जान जा चुकी है, तब आखिर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी कहां है? यदि कैमरा इन लोगों तक पहुंच सकता है, तो जिम्मेदार विभाग की नजर इन पर क्यों नहीं पड़ रही।
मस्तूरी क्षेत्र के दर्रीघाट और मानिकपुर में किए गए स्टिंग के दौरान जो तस्वीरें सामने आईं, वे किसी भी जिम्मेदार व्यवस्था को झकझोर देने के लिए काफी हैं। खुद को होम्योपैथिक चिकित्सक बताने वाला एक व्यक्ति मरीज के घर पहुंचा और महिला को इंजेक्शन लगाने की बात सामने आई। महिला ने कैमरे पर इंजेक्शन लगाए जाने की पुष्टि भी की और शरीर पर वह स्थान भी दिखाया जहां इंजेक्शन लगाया गया था। इतना ही नहीं, दूसरी महिला को भी इंजेक्शनy लगाने की तैयारी चल रही थी कि कैमरा देखते ही दवाइयों का बैग छिपाने की कोशिश शुरू हो गई।
सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति होम्योपैथिक डॉक्टर होने का दावा करता है तो उसके बैग में होम्योपैथिक दवाओं के बजाय एलोपैथिक इंजेक्शन और दवाइयां क्यों हैं? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उसके पास न तो मान्य चिकित्सकीय योग्यता का प्रमाण मिला और न ही एलोपैथिक उपचार या इंजेक्शन देने का वैध अधिकार। यदि यह सही है तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सीधे लोगों की जान को जोखिम में डालने का मामला है।
ग्रामीणों की मजबूरी आज कथित झोलाछाप डॉक्टरों की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। जहां सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं समय पर नहीं पहुंच पातीं, वहां कथित फर्जी डॉक्टर बेखौफ होकर इलाज का कारोबार चला रहे हैं। बिलासपुर और कोटा क्षेत्र में गलत इलाज के कारण पहले भी कई लोगों, विशेषकर बच्चों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। कार्रवाई हुई, क्लीनिक सील हुए, लेकिन तस्वीरें बता रही हैं कि अवैध इलाज का यह नेटवर्क अब भी सक्रिय है।

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