संयुक्त मोर्चा के तत्वाधान में पत्थलगांव में अनुपम गरिमा, वैचारिक उत्कर्ष एवं अभूतपूर्व जनोन्मेष के साथ मनाई गई डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 135वीं जयंती

संयुक्त मोर्चा के तत्वाधान में पत्थलगांव में अनुपम गरिमा, वैचारिक उत्कर्ष एवं अभूतपूर्व जनोन्मेष के साथ मनाई गई डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 135वीं जयंती

पत्थलगांव की पुण्यभूमि पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग मोर्चा के संयुक्त तत्वाधान में भारत रत्न, युगप्रवर्तक, समतामूलक चिंतन के अधिष्ठाता एवं आधुनिक भारतीय लोकतंत्र के शिल्पी डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 135वीं जयंती विलक्षण भव्यता, अनुशासनबद्धता एवं वैचारिक ऊँचाई के साथ संपन्न हुई। यह आयोजन केवल उत्सव नहीं, अपितु सामाजिक आत्मबोध, स्वाभिमान जागरण तथा न्याय-सम्मत व्यवस्था की पुनःप्रतिज्ञा का सजीव एवं सशक्त उद्घोष बनकर उभरा।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रबुद्धजनों द्वारा बाबा साहब के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। यह क्षण उस महामानव के प्रति सामूहिक कृतज्ञता का प्रतीक था, जिनके दूरदर्शी चिंतन एवं अदम्य संघर्ष ने सदियों से वंचित, शोषित एवं उपेक्षित वर्गों को अधिकार, गरिमा एवं आत्मसम्मान का नवोदय प्रदान किया।

इस अवसर पर आयोजित भव्य बाइक रैली एवं शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से अनुशासन, सौहार्द एवं समन्वय के साथ संपन्न हुई। अम्बेडकर नगर से प्रारंभ होकर सेंट जेवियर्स चौक, बी.टी.आई. चौक, बस स्टैंड, चिड़रापारा, जशपुर मार्ग होते हुए महादेवटिकरा एवं गोढीकला तक पहुँची इस विराट शोभायात्रा ने सम्पूर्ण नगर को "जय भीम" के ओजस्वी घोषों से गुंजायमान कर दिया। मार्ग में नागरिकों द्वारा किया गया आत्मीय स्वागत, जलपान एवं अभिनंदन सामाजिक समरसता एवं पारस्परिक सद्भाव का सशक्त प्रमाण रहा।

महादेवटिकरा एवं गोढीकला में नव-स्थापित बाबा साहब की प्रतिमाओं का विधिवत अनावरण सामूहिक नेतृत्व एवं सामाजिक सहभागिता के साथ सम्पन्न हुआ। यह अनावरण मात्र प्रतिमा उद्घाटन नहीं, बल्कि उस महान विचारधारा का उद्घोष था, जो समानता, न्याय, स्वतंत्रता एवं मानवीय गरिमा के उच्चतम आदर्शों पर आधारित है। उपस्थित जनसमूह द्वारा सामूहिक माल्यार्पण ने श्रद्धा को जनभावना के विराट रूप में अभिव्यक्त किया।

शोभायात्रा की विशेषता सुसज्जित भव्य पालकी, अनुशासित पंक्तियों में गतिमान जनसमूह, महिला शक्ति की सक्रिय सहभागिता एवं नवयुवकों का उत्साहपूर्ण योगदान रहा। भीम संगीत की गूंज ने वातावरण को ऊर्जा, चेतना एवं प्रेरणा से परिपूर्ण कर दिया। यह दृश्य स्पष्ट करता है कि बाबा साहब के विचार आज भी नवपीढ़ी के हृदय में जीवंत एवं प्रज्वलित हैं।

वक्ताओं ने अपने उद्बोधनों में प्रतिपादित किया कि डॉ. अंबेडकर का जीवन अन्याय, असमानता एवं सामाजिक विषमता के विरुद्ध एक अखंड संघर्ष का इतिहास है। उन्होंने शिक्षा को मुक्ति का शस्त्र, संगठन को शक्ति का आधार एवं संघर्ष को परिवर्तन का साधन बताया। उनका अमर संदेश— “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो”—आज भी प्रत्येक नागरिक के लिए जीवनदर्शन का आलोकस्तंभ है।

आगे यह भी कहा गया कि बाबा साहब द्वारा प्रतिपादित समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व एवं न्याय के सिद्धांत केवल संवैधानिक आदर्श नहीं, बल्कि एक आदर्श मानव समाज की अनिवार्य आधारशिला हैं। उनका दृष्टिकोण विधिक संरचना से परे सामाजिक, आर्थिक एवं नैतिक पुनर्जागरण की व्यापक परिकल्पना को अभिव्यक्त करता है। उनके विचारों का आत्मसात ही एक सशक्त, समतामूलक एवं न्यायपूर्ण राष्ट्र के निर्माण का वास्तविक पथ प्रशस्त कर सकता है।

कार्यक्रम के दौरान विविध सामाजिक, सांस्कृतिक एवं वैचारिक गतिविधियाँ संपन्न हुईं, जिनमें जनसहभागिता उल्लेखनीय रही। समापन अवसर पर आयोजक समिति द्वारा समस्त अतिथियों, सहयोगियों एवं जनसमूह के प्रति हृदयतल से आभार व्यक्त किया गया तथा समाज के प्रत्येक वर्ग से बाबा साहब के आदर्शों को जीवन में अंगीकार कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।

यह आयोजन न केवल एक जयंती समारोह, बल्कि सामाजिक जागरण, आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना एवं मानवीय मूल्यों के पुनरुत्थान का एक अविस्मरणीय एवं ऐतिहासिक अध्याय सिद्ध हुआ।

— अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / पिछड़ा वर्ग मोर्चा, पत्थलगांव