छत्तीसगढ़ के विकास का प्रमुख इंजन बनेगा हाउसिंग बोर्ड, आवास के साथ अधोसंरचना विकास में निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका : आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मंडल को आर्थिक रूप से सुदृढ़ और बहुआयामी अधोसंरचना विकास संस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

 

छत्तीसगढ़ के विकास का प्रमुख इंजन बनेगा हाउसिंग बोर्ड, आवास के साथ अधोसंरचना विकास में निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका : आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में मंडल को आर्थिक रूप से सुदृढ़ और बहुआयामी अधोसंरचना विकास संस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

श्री चौधरी ने कहा कि तेजी से विकास करती अर्थव्यवस्था में अधोसंरचना निर्माण के लिए केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी), टाउन प्लानिंग स्कीम (टीपीएस), पुनर्विकास और अन्य नवाचारी वित्तीय मॉडल अपनाने होंगे।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने टाउन प्लानिंग स्कीम के क्रियान्वयन से संबंधित अधिकारों का विस्तार करते हुए हाउसिंग बोर्ड, सीएसआईडीसी और नगरीय निकायों को भी इस दिशा में कार्य करने का अवसर दिया है।
उन्होंने कहा कि टीपीएस मॉडल के माध्यम से निजी भूमि का योजनाबद्ध विकास कर सड़क, जलापूर्ति, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य आवश्यक अधोसंरचना का निर्माण किया जा सकता है। विकास लागत और आवश्यक भूमि का समायोजन करने के बाद भू-स्वामियों को विकसित भूखंड उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे भूमि अधिग्रहण संबंधी कठिनाइयों को कम करते हुए व्यवस्थित शहरी विकास को बढ़ावा मिलता है।
*सेरीखेड़ी परियोजना में पीपीपी मॉडल से लगभग 94 एकड़ भूमि की बचत का उदाहरण*
मंत्री श्री चौधरी ने सेरीखेड़ी क्षेत्र की टाउन प्लानिंग परियोजना का उदाहरण देते हुए बताया कि लगभग 800 करोड़ रुपये की अधोसंरचना विकास लागत वाली परियोजना को पीपीपी मॉडल के माध्यम से आगे बढ़ाने की पहल की गई है।
उन्होंने बताया कि परियोजना में विकास लागत के समायोजन के लिए प्रारंभिक गणना के अनुसार लगभग 218 एकड़ भूमि की आवश्यकता थी। प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के बाद यह आवश्यकता लगभग 124 एकड़ तक सीमित हो गई। इस प्रकार लगभग 94 एकड़ भूमि की बचत संभव हुई, जिसका उपयोग अन्य सार्वजनिक आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मॉडल से सरकारी बजट पर प्रत्यक्ष वित्तीय दबाव कम करने के साथ नागरिकों को बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध कराई जा सकती है।
*शासकीय भूमि के पुनर्विकास से विकसित होंगी आधुनिक सार्वजनिक सुविधाएं*
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न शहरों में महत्वपूर्ण स्थानों पर स्थित शासकीय भूमि का बेहतर उपयोग करने की व्यापक संभावनाएं हैं। ऐसी भूमि को पुनर्विकास मॉडल के माध्यम से विकसित कर जनोपयोगी सुविधाओं का विस्तार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी शासकीय भूमि के एक हिस्से का व्यावसायिक उपयोग कर प्राप्त संसाधनों से आधुनिक कलेक्ट्रेट भवन, शासकीय कार्यालय, पुस्तकालय, उद्यान, स्टेडियम, इंडोर खेल परिसर और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का निर्माण किया जा सकता है। इससे सरकारी बजट पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना शहरों में आधुनिक अधोसंरचना विकसित करने के अवसर बढ़ेंगे।
उन्होंने मंडल के अधिकारियों से ऐसी संभावनाओं की पहचान कर व्यावहारिक और आर्थिक रूप से सक्षम परियोजनाएं तैयार करने का आह्वान किया।
खेल अधोसंरचना के निर्माण के साथ संचालन और रखरखाव पर भी देना होगा ध्यान
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि खेल अधोसंरचना का निर्माण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका नियमित रखरखाव, बेहतर संचालन और अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। इसके लिए विशेषज्ञ संस्थाओं की भागीदारी और आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था विकसित करनी होगी। उन्होंने रायपुर के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का उदाहरण देते हुए कहा कि खेल सुविधाओं के प्रभावी संचालन से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन की संभावनाएं बढ़ती हैं। ऐसे आयोजनों से होटल, परिवहन, पर्यटन, व्यापार और सेवा क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलता है।
उन्होंने नवा रायपुर में बैडमिंटन, तैराकी, स्क्वैश और क्रिकेट जैसी खेल विधाओं के लिए प्रतिष्ठित खिलाड़ियों एवं विशेषज्ञ संस्थाओं के सहयोग से प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित करने की पहल का भी उल्लेख किया।
*आधुनिक तकनीक, एआई और बेहतर प्रबंधन पर केंद्रित रही प्रशिक्षण कार्यशाला*
नवा रायपुर में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला में मंडल के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशासनिक दक्षता, आधुनिक तकनीक, वित्तीय प्रबंधन, संपदा प्रबंधन तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।