सुशासन तिहार : जनविश्वास, जनकल्याण और विकास की एक नई जीवंत गाथा

सुशासन तिहार : जनविश्वास, जनकल्याण और विकास की एक नई जीवंत गाथा

छत्तीसगढ़ की माटी में इन दिनों ‘सुशासन तिहार’ की गूँज एक जन-आंदोलन की तरह सुनाई दे रही है। यह महज सरकारी महकमों का कोई साधारण अभियान नहीं, बल्कि लोकतंत्र की उस सर्वोच्च भावना का जीवंत प्रमाण है, जहाँ सरकार खुद चलकर गाँवों और शहरों के द्वार तक पहुँची है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस अनूठी पहल ने यह साबित कर दिया है कि सुशासन का मतलब सिर्फ फाइलों का निपटारा नहीं, बल्कि समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के चेहरे पर संतोष और मुस्कान लाना है।

जन-संवाद और चौपालों की आत्मीयता

बस्तर के आयतु से लेकर सरगुजा के तिहारू और धमतरी के नगरी अंचल के ईतवारी राम कमार जैसे आम नागरिकों के लिए अब शासन-प्रशासन किसी दूर की कौड़ी नहीं रहा। राज्य के सुदूर अंचलों में जब तपती दोपहरी के बीच हेलिकॉप्टर उतरा और प्रदेश के मुखिया सीधे ग्रामीणों के बीच चौपाल में पहुंचे, तो लोगों का विश्वास और अधिक प्रगाढ़ हो गया।

  • पारदर्शी और लोक-केंद्रित शासन: शिविरों के दौरान ग्रामीणों ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी जरूरतें साझा कीं।
  • त्वरित निर्णय: हैंडपंप सुधार, तालाब घाट निर्माण, सामुदायिक एवं आंगनबाड़ी भवन, बिजली लाइनों के विस्तार जैसे छोटे-छोटे सार्वजनिक कार्यों को मुख्यमंत्री ने मौके पर ही स्वीकृति प्रदान की।

गाँव, गरीब और किसानों के विकास की समीक्षा

इस वर्ष पूरे प्रदेश में 01 मई से 10 जून तक चले इस महाअभियान के तहत त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं, प्रभारी मंत्रियों और सचिवों ने मैदानी स्तर पर सरकारी योजनाओं का कड़ाई से मूल्यांकन किया।

  • खाद्यान्न एवं जनवितरण प्रणाली: बस्तर से सरगुजा तक पीडीएस दुकानों के माध्यम से किफायती दरों पर राशन और अंत्योदय अन्न योजना के सुचारू भंडारण की समीक्षा की गई।
  • कृषि और राजस्व प्रकरण: मनरेगा श्रमिकों के समय पर मजदूरी भुगतान, अविवादित नामांतरण, बटवारा और सीमांकन जैसे महत्वपूर्ण राजस्व मामलों का प्राथमिकता से निराकरण किया गया।
  • पेयजल एवं स्वच्छता: संपूर्ण स्वच्छता अभियान, निर्मल ग्राम योजना के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में पेयजल स्रोतों की साफ-सफाई पर विशेष जोर दिया गया।

जनविश्वास की मजबूत नींव

सुशासन तिहार ने छत्तीसगढ़ में शासन और जनता के बीच की दूरियों को पाट दिया है। यह इस बात का प्रतीक है कि जब नीतियां जनहित को केंद्र में रखकर बनाई जाती हैं और प्रशासन खुद जनता के द्वार पर दस्तक देता है, तो विकास की रफ्तार स्वतः तेज हो जाती है। अधिक विस्तृत जानकारी और आधिकारिक अपडेट के लिए आप छत्तीसगढ़ शासन पोर्टल पर जा सकते हैं