*ई-रिक्शा ने बदली संगीता की जिंदगी, आत्मनिर्भरता की राह पर बनीं लखपति दीदी, दुलदुला की संगीता देवी ई-रिक्शा चलाकर कमा रहीं प्रतिमाह 15 से 18 हजार रुपये की शुद्ध आय, मुख्यमंत्री जशपुर एक्सप्रेस योजना से मिला स्वरोजगार का अवसर, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा*
जशपुरनगर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं और बिहान मिशन से ग्रामीण महिलाएं आज अपनी मेहनत और इच्छाशक्ति के बल पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।
इसी की एक प्रेरक मिसाल जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड की ग्राम पंचायत छेरडाढ़ निवासी श्रीमती संगीता देवी हैं। कभी परिवार की जरूरतों और कृषि कार्यों के लिए छोटे-छोटे ऋण लेने वाली संगीता आज स्वयं ई-रिक्शा चलाकर प्रतिमाह लगभग 15 से 18 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं।
अपनी मेहनत और स्वरोजगार के बल पर वह लखपति दीदी की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।
बिहान समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाए कदम
संगीता देवी वर्ष 2018 में दीपक स्व-सहायता समूह के माध्यम से बिहान मिशन से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, ऋण सुविधा और आजीविका संवर्धन के विभिन्न अवसरों की जानकारी मिली। उन्होंने समूह से छोटे-छोटे ऋण लेकर कृषि कार्यों और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा किया।
धीरे-धीरे उनके मन में अपनी स्वतंत्र आय का स्रोत विकसित करने की इच्छा मजबूत हुई। इसी सोच के साथ उन्होंने दुलदुला के संकुल संगठन के समक्ष ई-रिक्शा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने दुलदुला से पतराटोली मार्ग पर यात्रियों की अच्छी आवाजाही और ई-रिक्शा के माध्यम से रोजगार की संभावनाओं के बारे में भी बताया।
मुख्यमंत्री जशपुर एक्सप्रेस योजना से मिला अवसर
संगीता की पहल, इच्छाशक्ति और आजीविका के प्रति स्पष्ट सोच को देखते हुए मुख्यमंत्री जशपुर एक्सप्रेस योजना के तहत वर्ष 2025 में उन्हें बैटरी संचालित ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया।
रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के हाथों ई-रिक्शा प्राप्त करना उनके जीवन का यादगार पल बन गया।
ई-रिक्शा मिलने के बाद संगीता ने इसे केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि अपनी आर्थिक स्वतंत्रता का माध्यम बनाया।
पिछले करीब एक वर्ष से वह स्वयं ई-रिक्शा चला रही हैं। इससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 700 से 800 रुपये की आमदनी होती है। सभी खर्चों को निकालने के बाद वह प्रतिमाह लगभग 15 से 18 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं।
परिवार को आर्थिक संबल, बच्चों के बेहतर भविष्य की चिंता
आज संगीता अपनी कमाई से बच्चों का बेहतर ढंग से पालन-पोषण कर रही हैं। परिवार की जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक सहयोग देने के साथ ही आवश्यकता पड़ने पर पति की भी मदद कर रही हैं। अब वह परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में बराबर की भागीदारी निभा रही हैं।
संगीता बताती हैं कि बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें समूह की ताकत, ऋण सुविधा और आजीविका के नए अवसरों के बारे में जानकारी मिली। ई-रिक्शा ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। वह अब अन्य बिहान दीदियों को भी केवल कृषि गतिविधियों तक सीमित न रहकर गैर-कृषि गतिविधियों और स्वरोजगार के नए अवसर अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
संगीता देवी की यह सफलता बताती है कि ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूह, वित्तीय सहयोग, आजीविका के अवसर और प्रशासन का मार्गदर्शन मिले तो वे अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं। साथ ही वे स्वयं रोजगार सृजित कर दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं।
संगीता इस पहल के लिए जिला प्रशासन जशपुर और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। उनका कहना है कि ई-रिक्शा ने उन्हें केवल आय का साधन ही नहीं दिया, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान के साथ जीवन में आगे बढ़ने का अवसर भी दिया है।
संगीता देवी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि जब ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लेती हैं और उन्हें उचित अवसर एवं सहयोग मिलता है, तो वे सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल कर सकती हैं। ।
स्वावलंबन से सम्मान और मेहनत से आत्मनिर्भरता की यह कहानी ग्रामीण जशपुर में महिला सशक्तीकरण की एक प्रेरक तस्वीर प्रस्तुत करती है।
Chief Editor